ai gul-e-nau-dameeda ke maanind | ऐ गुल‌‌‌‌-ए-नौ-दमीदा के मानिंद

  - Meer Taqi Meer
गुल‌‌‌‌-ए-नौ-दमीदाकेमानिंद
हैतूकिसआफ़रीदाकेमानिंद
हमउम्मीद-ए-वफ़ापेतेरीहुए
गुंचा-ए-दैरचीदाकेमानिंद
ख़ाककोमेरीसैरकरकेफिरा
वोग़ज़ाल-ए-रमीदाकेमानिंद
सरउठातेहीहोगएपामाल
सब्ज़ा-ए-नौ-दमीदाकेमानिंद
कटेरातहिज्रकीजोहो
नालातेग़-ए-कशीदाकेमानिंद
हमगिरफ़्तार-ए-हालहैंअपने
ताइर-ए-पर-बुरीदाकेमानिंद
दिलतड़पताहैअश्क-ए-ख़ूनींमें
सैद-ए-दर-ख़ूँतपीदाकेमानिंद
तुझसेयूसुफ़कोक्यूँँकेनिस्बतदें
कबशुनीदाहोदीदाकेमानिंद
'मीर'-साहिबभीउसकेहाँथेलेक
बंदा-ए-ज़रख़रीदाकेमानिंद
  - Meer Taqi Meer
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy