kahte hain bahaar aayi gul phool nikalte hain | कहते हैं बहार आई गुल फूल निकलते हैं

  - Meer Taqi Meer
कहतेहैंबहारआईगुलफूलनिकलतेहैं
हमकुंज-ए-क़फ़समेंहैंदिलसीनोंमेंजलतेहैं
अबएकसीबे-होशीरहतीनहींहैहमको
कुछदिलभीसँभलतेहैंपरदेरसँभलतेहैं
वोतोनहींइकछींटारोनेकाहुआगाहे
अबदीदा-ए-तरअक्सरदरियासेउबलतेहैं
उनपाँवकोआँखोंसेहममलतेरहेजैसा
अफ़्सोससेहाथोंकोअबवैसाहीमलतेहैं
क्याकहिएकिआ'ज़ासबपानीहुएहैंअपने
हमआतिश-ए-हिज्राँमेंयूँँहीपड़ेगलतेहैं
करतेहैंसिफ़तजबहमलाल-ए-लब-ए-जानाँकी
तबकोईहमेंदेखेक्याला'लउगलतेहैं
गुलफूलसेभीअपनेदिलतोनहींलगतेटुक
जीलोगोंकेबेजानाँकिसतौरबहलतेहैं
हैंनर्मसनमगोकहनेकेतईंवर्ना
पत्थरहैंउन्होंकेदिलकाहेकोपिघलतेहैं
गर्म-ए-सफ़रयाराँजोहैसोसर-ए-रहहै
जोरहसकोरहजाओअब'मीर'भीचलतेहैं
  - Meer Taqi Meer
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