kya kahiye ki khooban ne ab ham men hai kya rakha | क्या कहिए कि ख़ूबाँ ने अब हम में है क्या रखा

  - Meer Taqi Meer
क्याकहिएकिख़ूबाँनेअबहममेंहैक्यारखा
इनचश्म-सियाहोंनेबहुतोंकोसुलारखा
जल्वाहैउसीकासबगुलशनमेंज़मानेके
गुलफूलकोहैउननेपर्दासाबनारखा
जूँबर्गख़िज़ाँ-दीदासबज़र्दहुएहमतो
गर्मीनेहमेंदिलकीआख़िरकोजलारखा
कहिएजोतमीज़उसकोकुछअच्छेबुरेकीहो
दिलजिसकसोकापायाचटउननेउड़ारखा
थीमस्लक-ए-उल्फ़तकीमशहूरख़तरनाकी
मैंदीदा-ओ-दानिस्ताकिसराहमेंपारखा
ख़ुर्शीद-ओ-क़मरप्यारेरहतेहैंछुपेकोई
रुख़्सारोंकोगोतूनेबुर्क़ासेछुपारखा
चश्मकहीनहींताज़ीशेवेयेउसीकेहैं
झमकीसीदिखादेकरआलमकोलगारखा
लगनेकेलिएदिलकेछिड़काथानमकमैंने
सौछातीकेज़ख़्मोंनेकलदेरमज़ारखा
कुश्तेकोइसअबरूकेक्यामेलहोहस्तीकी
मैंताक़बुलंदऊपरजीनेकोउठारखा
क़तईहैदलील'मीर'उसतेग़कीबे-आबी
रहमउननेमिरेहक़मेंमुतलक़रवारखा
  - Meer Taqi Meer
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