zakham jhele daagh bhi kh | ज़ख़्म झेले दाग़ भी खाए बहुत

  - Meer Taqi Meer
ज़ख़्मझेलेदाग़भीखाएबहुत
दिललगाकरहमतोपछताएबहुत
जबतबजागहसेतुमजायाकिए
हमतोअपनीओरसेआएबहुत
दैरसेसू-ए-हरमआयाटुक
हममिज़ाजअपनाइधरलाएबहुत
फूलगुलशम्सक़मरसारेहीथे
परहमेंइनमेंतुम्हींभाएबहुत
गरबुकाइसशोरसेशबकोहैतो
रोवेंगेसोनेकोहम-साएबहुत
वोजोनिकलासुब्हजैसेआफ़्ताब
रश्कसेगुलफूलमुरझाएबहुत
'मीर'सेपूछाजोमैं'आशिक़होतुम
होकेकुछचुपकेसेशरमाएबहुत
  - Meer Taqi Meer
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