हैहालजाएगिर्या-ए-जाँपरआरज़ूका
रोएनहमकभूटकदामनपकड़कसोका
जातीनहींउठाईअपनेपेयेख़ुशुनत
अबरहगयाहैआनामेराकभूकभूका
उसआस्ताँसेकिसदिनपुर-शोरसरनपटका
उसकीगलीमेंजाकरकिसरातमैंनकूका
शायदकिमुँदगईहैक़मरीकीचश्म-ए-गिर्यां
कुछटूटसाचलाहैपानीचमनकीजूका
अपनेतड़पनेकीतोतदबीरपहलेकरलूँ
तबफ़िक्रमैंकरूँँगाज़ख़्मोंकेभीरफ़ूका
दाँतोंकीनज़्मउसकेहँसनेमेंजिननेदेखी
फिरमोतियोंकीलड़परउननेकभूनथूका
येऐश-गानहींहैयाँरंगऔरकुछहै
हरगुलहैइसचमनमेंसाग़रभरालहूका
बुलबुलग़ज़ल-सराईआगेहमारेमतकर
सबहमसेसीखतेहैंअंदाज़गुफ़्तुगूका
गलियाँभरीपड़ीहैंऐबादज़ख़्मियोंसे
मतखोलपेचज़ालिमउसज़ुल्फ़-ए-मुश्क-बूका
वेपहलीइलतिफ़ातेंसारीफ़रेबनिकलीं
देनानथादिलउसकोमैं'मीर'आहचौका