ab ke bhi sair baagh ki jee men havas rahi | अब के भी सैर बाग़ की जी में हवस रही

  - Meer Taqi Meer
अबकेभीसैरबाग़कीजीमेंहवसरही
अपनीजगहबहारमेंकुंज-ए-क़फ़सरही
मैंपा-शिकस्ताजासकाक़ाफ़िलेतलक
आतीअगरचेदेरसदा-ए-जरसरही
लुत्फ़क़बा-ए-तंगपेगुलकाबजाहैनाज़
देखीनहींहैउननेतिरीचोलीचुसरही
दिन-रातमेरीआँखोंसेआँसूचलेगए
बरसातअबकेशहरमेंसारेबरसरही
ख़ालीशगुफ़्तगीसेजराहतनहींकोई
हरज़ख़्मयाँहैजैसेकलीहोबक्सरही
दीवानगीकहाँकिगरेबाँसेतंगहूँ
गर्दनमिरीहैतौक़मेंगोयाकिफँसरही
जोंसुब्हइसचमनमेंहमखुलकेहँससके
फ़ुर्सतरहीजो'मीर'भीसोयक-नफ़सरही
  - Meer Taqi Meer
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