kasrat-e-daag se dil rask-e-gulistaan na hua | कसरत-ए-दाग़ से दिल रश्क-ए-गुलिस्ताँ न हुआ

  - Meer Taqi Meer
कसरत-ए-दाग़सेदिलरश्क-ए-गुलिस्ताँहुआ
मेरादिलख़्वाहजोकुछथावोकभूयाँहुआ
जीतोऐसेकईसदक़ेकिएतुझपरलेकिन
हैफ़येहैकितनिकतूभीपशेमाँहुआ
आहमेंकबकीकिसर्माया-ए-दोज़ख़हुई
कौनसाअश्कमिरामम्बा-ए-तूफ़ाँहुआ
गोतवज्जोहसेज़मानेकीजहाँमेंमुझको
जाह-ओ-सर्वतकामुयस्सरसर-ओ-सामाँहुआ
शुक्र-सद-शुक्रकिमैंज़िल्लत-ओ-ख़्वारीकेसबब
किसीउनवानमेंहम-चश्म-ए-अज़ीज़ाँहुआ
बर्क़मतख़ोशेकीऔरअपनीबयाँकरसोहबत
शुक्रकरयेकिमिरावाँदिल-ए-सोज़ाँहुआ
दिल-ए-बे-रहमगयाशैख़लिएज़ेर-ए-ज़मीं
मरगयापरयेकुहनगब्र-मुसलमाँहुआ
कौनसीरातज़मानेमेंगईजिसमें'मीर'
सीना-ए-चाकसेमैंदस्त-ओ-गरेबाँहुआ
  - Meer Taqi Meer
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