hai haal jaa.e girya-e-jaan par aarzoo ka | है हाल जाए गिर्या-ए-जाँ पर आरज़ू का

  - Meer Taqi Meer
हैहालजाएगिर्या-ए-जाँपरआरज़ूका
रोएहमकभूटकदामनपकड़कसोका
जातीनहींउठाईअपनेपेयेख़ुशुनत
अबरहगयाहैआनामेराकभूकभूका
उसआस्ताँसेकिसदिनपुर-शोरसरपटका
उसकीगलीमेंजाकरकिसरातमैंकूका
शायदकिमुँदगईहैक़मरीकीचश्म-ए-गिर्यां
कुछटूटसाचलाहैपानीचमनकीजूका
अपनेतड़पनेकीतोतदबीरपहलेकरलूँ
तबफ़िक्रमैंकरूँँगाज़ख़्मोंकेभीरफ़ूका
दाँतोंकीनज़्मउसकेहँसनेमेंजिननेदेखी
फिरमोतियोंकीलड़परउननेकभूथूका
येऐश-गानहींहैयाँरंगऔरकुछहै
हरगुलहैइसचमनमेंसाग़रभरालहूका
बुलबुलग़ज़ल-सराईआगेहमारेमतकर
सबहमसेसीखतेहैंअंदाज़गुफ़्तुगूका
गलियाँभरीपड़ीहैंबादज़ख़्मियोंसे
मतखोलपेचज़ालिमउसज़ुल्फ़-ए-मुश्क-बूका
वेपहलीइलतिफ़ातेंसारीफ़रेबनिकलीं
देनाथादिलउसकोमैं'मीर'आहचौका
  - Meer Taqi Meer
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