fikr hai maah ke jo shahr-badar karne ki | फ़िक्र है माह के जो शहर-बदर करने की

  - Meer Taqi Meer
फ़िक्रहैमाहकेजोशहर-बदरकरनेकी
हैसज़ातुझपेयेगुस्ताख़नज़रकरनेकी
कहहदीसआनेकीउसकेजोकियाशादीमर्ग
नामा-बरक्याचलीथीहमकोख़बरकरनेकी
क्याजलीजातीहैख़ूबीहीमेंअपनीशम्अ'
कहपतंगेकेभीकुछशाम-ओ-सहरकरनेकी
अबकेबरसातहीकेज़िम्मेंथाआलमकावबाल
मैंतोखाईथीक़समचश्मकेतरकरनेकी
फूलकुछलेतेनिकलेथेदिल-ए-सद-पारा
तर्ज़सीखीहैमिरेटुकड़ेजिगरकरनेकी
उनदिनोंनिकलेहैआग़ुश्ताब-ख़ूँरातोंको
धुनहैनालेकोकसोदिलमेंअसरकरनेकी
इश्क़मेंतेरेगुज़रतीनहींबिनसरपटके
सूरतइकयेरहीहैउम्रबसरकरनेकी
कारवानीहैजहाँउम्रअज़ीज़अपनी'मीर'
रहहैदरपेशसदाउसकोसफ़रकरनेकी
  - Meer Taqi Meer
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