sahr-e-gah-e-eid men daur-e-suboo tha | सहर-ए-गह-ए-ईद में दौर-ए-सुबू था

  - Meer Taqi Meer
सहर-ए-गह-ए-ईदमेंदौर-ए-सुबूथा
परअपनेजाममेंतुझबिनलहूथा
ग़लतथाआपसेग़ाफ़िलगुज़रना
समझेहमकिइसक़ालिबमेंतूथा
चमनकीवज़्अनेहमकोक्यादाग़
किहरग़ुंचा-दिलपरआरज़ूथा
गुल-ओ-आईनाक्याख़ुरशीद-ओ-महक्या
जिधरदेखातिधरतेराहीरूथा
करोगेयादबातेंतोकहोगे
किकोईरफ़्ता-ए-बिसयार-गोथा
जहाँपरहैफ़सानेसेहमारे
दिमाग़-ए-इश्क़हमकोभीकभूथा
मगरदीवानाथागुलभीकसोका
किपैराहनमेंसोजागारफ़ूथा
कहींक्याबालतेरेखुलगएथे
किझोंकाबावकाकुछमुश्कबूथा
देखा'मीर'आवाराकोलेकिन
ग़ुबारइकना-तवाँसाकू-ब-कूथा
  - Meer Taqi Meer
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