ai dost koi mujh sa rusva na hua hogaa | ऐ दोस्त कोई मुझ सा रुस्वा न हुआ होगा

  - Meer Taqi Meer
दोस्तकोईमुझसारुस्वाहुआहोगा
दुश्मनकेभीदुश्मनपरऐसाहुआहोगा
अबअश्क-ए-हिनाईसेजोतरकरेमिज़्गाँ
वोतुझकफ़-ए-रंगींकामाराहुआहोगा
टकगोर-ए-ग़रीबाँकीकरसैरकिदुनियामें
उनज़ुल्म-रसीदोंपरक्याक्याहुआहोगा
बे-नाला-ओ-बे-ज़ारीबे-ख़स्तगी-ओ-ख़ारी
इमरोज़कभीअपनाफ़र्दाहुआहोगा
हैक़ाएदाकुल्लीयेकू-ए-मोहब्बतमें
दिलग़मजोहुआहोगापैदाहुआहोगा
इसकोहना-ख़राबेमेंआबादीकरमुनइ'म
यकशहरनहींयाँजोसहराहुआहोगा
आँखोंसेतिरीहमकोहैचश्मकिअबहोवे
जोफ़ित्नाकिदुनियामेंबरपाहुआहोगा
जुज़मर्तबा-ए-कलकोहासिलकरेहैआख़िर
यकक़तरादेखाजोदरियाहुआहोगा
सदनश्तर-ए-मिज़्गाँकेलगनेसेनिकलाख़ूँ
आगेतुझे'मीर'ऐसासौदाहुआहोगा
  - Meer Taqi Meer
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