raah-e-safar men bandagi yuñ hi rahe | राह-ए-सफ़र में बंदगी यूँँ ही रहे

  - Manohar Shimpi
राह-ए-सफ़रमेंबंदगीयूँँहीरहे
क्यूँँफिरइबादतमेंकमीयूँँहीरहे
जबदिलकभीयूँँहीबुझासाहीरहे
फिरतिश्नगीमेंबे-रुख़ीयूँँहीरहे
देखीभलाईफ़ैसलालेतेतभी
अच्छीकोईआदतमेरीयूँँहीरहे
कोईमुकम्मलभीनहींहैइसलिए
इंसानियतमेंफिरकमीयूँँहीरहे
हसरत'मनोहर'मेरेभीदिलमेंरहे
हाँकैफ़ियतसबकीकभीयूँँहीरहे
  - Manohar Shimpi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy