बर्ग-ए-ख़िज़ाँ हो ही रही रुत आने जाने के लिए

  - Manohar Shimpi
बर्ग-ए-ख़िज़ाँहोहीरहीरुतआनेजानेकेलिए
शाख़-ए-निहाल-ए-ग़महरीहोगीज़मानेकेलिए
रिश्तेकभीतोमुंसलिकहोतेकिसीकेदर्दमें
कोईकसरबाक़ीनहींरखनाहँसानेकेलिए
चेहराबयाँजबइश्क़हीकरताज़बान-ए-हालभी
दिलइसलिएतुझकोदियाहैआज़मानेकेलिए
ऐसेकोईकबरूठताहैयारमेरेतूबता
साथीपुरानेख़ासहीहोंगेमनानेकेलिए
इसरारक्यातकरारक्याजोहै'मनोहर'बोलदे
इकदोस्तहोनाचाहिएसुननेसुनानेकेलिए
  - Manohar Shimpi
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