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Manohar Shimpi
dosti ke haseen nazare the
dosti ke haseen nazare the | दोस्ती के हसीं नज़ारे थे
- Manohar Shimpi
दोस्ती
के
हसीं
नज़ारे
थे
महज़
नन्हें
सभी
सितारे
थे
खेलने
का
अभी
कहे
ही
क्या
ख़ूब-सूरत
वही
नज़ारे
थे
हुस्न
पर
जब
कभी
हुई
बातें
सिर्फ़
उन
सेे
ही
इस्तिआरे
थे
शोर
दरिया
कहाँ
करे
है
अब
ख़ूब
सूने
लगे
किनारे
थे
दूर
रह
के
कभी
नहीं
मिलते
आ
समाँँ
में
दिखे
वो
तारे
थे
फिर
'मनोहर'
उन्हें
न
हम
भूले
दोस्त
सच्चे
वही
हमारे
थे
- Manohar Shimpi
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बहुत
ग़ुरूर
है
दरिया
को
अपने
होने
पर
जो
मेरी
प्यास
से
उलझे
तो
धज्जियाँ
उड़
जाएँ
Rahat Indori
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बस
टूटी
कश्ती
ही
बतला
सकती
है
इक
दरिया
की
कितनी
शक्लें
होती
हैं
Soubhari Deepesh Sharma
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दूर
से
ही
बस
दरिया
दरिया
लगता
है
डूब
के
देखो
कितना
प्यासा
लगता
है
Waseem Barelvi
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ये
इश्क़
नहीं
आसाँ
इतना
ही
समझ
लीजे
इक
आग
का
दरिया
है
और
डूब
के
जाना
है
Jigar Moradabadi
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जो
उस
तरफ़
से
इशारा
कभी
किया
उस
ने
मैं
डूब
जाऊंगा
दरिया
को
पार
करते
हुए
Ghulam Murtaza Rahi
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मैं
एक
ठहरा
हुआ
पुल,
तू
बहता
दरिया
है
तुझे
मिलूँगा
तो
फिर
टूट
कर
मिलूँगा
मैं
Subhan Asad
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तुमको
हम
ही
झूठ
लगेंगे
लेकिन
दरिया
झूठा
है
पहले
हमको
चाँद
मिला
था
फिर
दरिया
को
चाँद
मिला
Abhishar Geeta Shukla
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दिन
ढल
गया
और
रात
गुज़रने
की
आस
में
सूरज
नदी
में
डूब
गया,
हम
गिलास
में
Rahat Indori
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पा
के
तूफ़ां
का
इशारा
दरिया
तोड़
देता
है
किनारा
दरिया
Abdul Mannan Tarzi
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इस
नदी
की
धार
में
ठंडी
हवा
आती
तो
है
नाव
जर्जर
ही
सही,
लहरों
से
टकराती
तो
है
Dushyant Kumar
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हाँ
तुझे
बे-हिसाब
चाहा
था
हिज्र
में
इक
जवाब
चाहा
था
हुस्न
के
रंग
तो
निराले
हैं
आप
सा
माहताब
चाहा
था
ख़ास
मिलके
तुझे
वहाँ
हमदम
देखना
बे-हिजाब
चाहा
था
शोख़
सी
वो
अदा
बताती
है
हुस्न
को
ला-जवाब
चाहा
था
उस
नज़र
से
कहाँ
कभी
देखा
इश्क़
में
फिर
हुबाब
चाहा
था
झूठ
को
बे-नक़ाब
करना
था
इसलिए
सच
जवाब
चाहा
था
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Manohar Shimpi
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इश्क़
जब
आग
है
वस्ल
दरिया
रहे
फिर
शब-ए-वस्ल
दिल
से
समुंदर
लगे
Manohar Shimpi
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काश
उस
वक़्त
सब
खड़े
होते
अपने
हक़
के
लिए
अड़े
होते
Manohar Shimpi
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कर्ब
से
ही
कोई
रिश्ता
है
पुराना
ख़्वाब
दे
जाते
नया
फिर
इक
बहाना
Manohar Shimpi
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कभी
तकरार
थोड़ी
सी
मुहब्बत
में
ज़रूरी
है
अगर
है
इश्क़
गहरा
फिर
वो
गहराई
उसी
में
हो
Manohar Shimpi
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