समुंदरोंकीतरहहैख़बरबताऊँमैं
छुपासकीनख़ुशीदर्दभूलजाऊँमैं
चराग़रोज़हीबुतमेंसदाजलातीहूँ
उसीदिएकीतरहख़ूबमुस्कुराऊँमैं
तमामलोगमिलेऔरबातछोटीथी
घड़ी-घड़ीहीउसेफिरकिसेबताऊँमैं
कलीखिलीनखिलीरातमेंमहकतीहै
जुनूँकलीसादिखेऔरमुस्कुराऊँमैं
जुदाइयाँतोलिखीहीहुईंमुक़द्दरमें
कभीख़फ़ानहुईहिज्रमेंबताऊँमैं
रह-ए-वफ़ासे"मनोहर"अगरसभीजीते
वोएकचाहमेरीहैकिसेसुनाऊँमैं