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Manohar Shimpi
karb se hi koii rishta hai puraana
karb se hi koii rishta hai puraana | कर्ब से ही कोई रिश्ता है पुराना
- Manohar Shimpi
कर्ब
से
ही
कोई
रिश्ता
है
पुराना
ख़्वाब
दे
जाते
नया
फिर
इक
बहाना
- Manohar Shimpi
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साथ
में
तू
मेरे
दो
गाम
तो
चल
सकता
है
इतना
चलने
से
मेरा
काम
तो
चल
सकता
है
तेरे
दिल
में
किसी
शायर
की
जगह
तो
होगी
इस
इलाके
में
मेरा
नाम
तो
चल
सकता
है
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Ashu Mishra
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हमारे
कुछ
गुनाहों
की
सज़ा
भी
साथ
चलती
है
हम
अब
तन्हा
नहीं
चलते
दवा
भी
साथ
चलती
है
Munawwar Rana
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अँधेरों
में
भले
ही
साथ
छोड़ा
था
हमारा
मगर
जब
रौशनी
लौटी
तो
साए
लौट
आए
Vikas Sahaj
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तुम
अगर
साथ
देने
का
वा'दा
करो
मैं
यूँँही
मस्त
नग़्में
लुटाता
रहूँ
तुम
मुझे
देख
कर
मुस्कुराती
रहो
मैं
तुम्हें
देख
कर
गीत
गाता
रहूँ
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Sahir Ludhianvi
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हमेशा
साथ
सबके
तो
ख़ुदा
भी
रह
नहीं
सकता
बनाकर
औरतें
उसने
ज़मीं
को
यूँँ
किया
जन्नत
Anukriti 'Tabassum'
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मौत
के
साथ
हुई
है
मिरी
शादी
सो
'ज़फ़र'
उम्र
के
आख़िरी
लम्हात
में
दूल्हा
हुआ
मैं
Zafar Iqbal
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बात
करते
हुए
बे-ख़याली
में
ज़ुल्फ़ें
खुली
छोड़
दी
हम
निहत्थों
पे
उसने
ये
कैसी
बलाएँ
खुली
छोड़
दी
साथ
जब
तक
रहे
एक
लम्हे
को
भी
रब्त
टूटा
नहीं
उसने
आँखें
अगर
बंद
कर
ली
तो
बाँहें
खुले
छोड़
दी
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Khurram Afaq
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पता
करो
कि
मेरे
साथ
कौन
उतरा
था
ज़मीं
पे
कोई
अकेला
नहीं
उतरता
है
Ahmad Abdullah
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राब्ता
लाख
सही
क़ाफ़िला-सालार
के
साथ
हम
को
चलना
है
मगर
वक़्त
की
रफ़्तार
के
साथ
Qateel Shifai
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मुझे
अब
आइनों
की
क्या
ज़रूरत
मैं
अपने
साथ
अब
रहने
लगा
हूँ
Madan Mohan Danish
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आज
ख़ामोश
है
समा
इतना
आसमाँ
भी
बुझा
लगे
कितना
ढूँढ़ना
चाहते
जिसे
दिल
से
दंग
मिल
के
मैं
भी
हुआ
कितना
आसमाँ
गर्द
ही
रहे
जब
भी
ज़िक्र
हो
रंग
का
दिखे
जितना
चाँद
पूरा
फ़लक
पे
आता
तब
नूर
चेहरे
पे
ही
दिखे
इतना
अब
'मनोहर'
वजूद
का
क्या
है
ख़्वाब
देखा
कभी
बड़ा
कितना
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Manohar Shimpi
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हुस्न
की
तुर्फ़गी
किसे
मिलती
साथ
में
सादगी
किसे
मिलती
है
अगर
बा-सफ़ा
मुहब्बत
तो
ऐसे
दीवानगी
किसे
मिलती
इश्क़
की
ख़ामुशी
ज़ुबाँ
होती
फिर
ये
आज़ुर्दगी
किसे
मिलती
आज
कल
गुल
भी
काग़ज़ी
होते
फिर
तर-ओ-ताज़गी
किसे
मिलती
राह
जब
एक
ही
रहे
आख़िर
फिर
तेरी
बंदगी
किसे
मिलती
रोज़
चलते
सभी
इशारे
पर
अस्ल
की
ज़िंदगी
किसे
मिलती
और
क्या
चाहिए
'मनोहर'
अब
ऐसे
दिलबस्तगी
किसे
मिलती
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Manohar Shimpi
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खेल
कोई
बनाम
रहता
है
हश्र
का
भी
मक़ाम
रहता
है
मय-कदे
में
कहाँ
सभी
मिलते
सिर्फ़
क़िस्सा
तमाम
रहता
है
बंदगी
भी
लगे
बड़ी
लेकिन
अब
दिल-ओ-दिल
में
राम
रहता
है
ऐ
मुहब्बत
नसीब
हो
तो
फिर
महज़
मिलना
ही
आम
रहता
है
कौन
सा
ताज
सर
पे
होता
है
उम्र
भर
सिर्फ़
नाम
रहता
है
इक
नज़र
से
अगर
नशा
होता
हाथ
क्यूँँ
कोई
जाम
रहता
है
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Manohar Shimpi
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हैं
ज़िंदगी
के
मस'अले
कितने
बताने
के
लिए
ख़ुशियाँ
बहुत
हैं
और
ग़म
थोड़े
ज़माने
के
लिए
Manohar Shimpi
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ये
दिल
तेरी
ज़ुल्फ़ों
से
गिरफ़्तार
हुआ
है
ख़ामोश
लबों
से
ही
तो
इज़हार
हुआ
है
Manohar Shimpi
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