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MANOBAL GIRI
ho rahi hai saazish meri barbaa
ho rahi hai saazish meri barbaa | हो रही है साज़िश मेरी बर्बादी की
- MANOBAL GIRI
हो
रही
है
साज़िश
मेरी
बर्बादी
की
घर
में
बात
चल
रही
है
मेरी
शादी
की
कुछ
वक़्त
बचा
है
मेरी
शादी
में
फिलहाल
मैं
जश्न
मना
रहा
हूँ
अभी
अपनी
आजादी
की
आँखों
में
आँसू,
चेहरे
पे
मुस्कान
लिए
आगे
बढ़
एक
बाप
डोली
उठा
रहा
है
अपनी
शहज़ादी
की
- MANOBAL GIRI
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कमाल-ए-ज़ब्त
को
ख़ुद
भी
तो
आज़माऊँगी
मैं
अपने
हाथ
से
उस
की
दुल्हन
सजाऊँगी
Parveen Shakir
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बीस
बरस
तक
बाप
उधड़ता
है
थोड़ा
थोड़ा
तब
सिलता
है
इक
बेटी
की
शादी
का
जोड़ा
Tanoj Dadhich
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वो
मिरे
सामने
दुल्हन
की
तरह
बैठे
हैं
ख़्वाब
अच्छा
है
मगर
ख़्वाब
में
क्या
रक्खा
है
Muzaffar Razmi
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मौत
के
साथ
हुई
है
मिरी
शादी
सो
'ज़फ़र'
उम्र
के
आख़िरी
लम्हात
में
दूल्हा
हुआ
मैं
Zafar Iqbal
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भुला
के
दूल्हा
जिसे
बैठता
है
मंडप
में
वो
चेहरा
आख़िरी
फेरे
में
याद
आता
है
Shanawar Kiratpuri
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इसलिए
ये
महीना
ही
शामिल
नहीं
उम्र
की
जंत्री
में
हमारी
उसने
इक
दिन
कहा
था
कि
शादी
है
इस
फरवरी
में
हमारी
Tehzeeb Hafi
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मैं
उस
को
देख
के
चुप
था
उसी
की
शादी
में
मज़ा
तो
सारा
इसी
रस्म
के
निबाह
में
था
Muneer Niyazi
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पहले
थोड़ी
मुश्किल
होगी
आगे
लेकिन
मंज़िल
होगी
सब
बाराती
शायर
होंगे
मेरी
शादी
महफ़िल
होगी
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Tanoj Dadhich
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उनको
दूर
किया
जाता
है
जो
बरसों
के
साथी
हैं
और
अनजाने
लोगों
की
आपस
में
शादी
होती
है
Darpan
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दूल्हा-दूल्हन
को
नहीं
तकता
कोई
क्यूँँ
कि
उस
बारात
में
इक
चाँद
है
Shadab Javed
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नींद
ज़रूरी
है
कोई
ख़्वाब
देखने
के
लिए
वो
छत
पे
आई
है
महताब
देखने
के
लिए
कोई
समझाये
उसे
की
वो
कोई
हक़ीम
नहीं
वो
ज़िद
कर
रही
है
मेरा
अज़ाब
देखने
के
लिए
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जब
से
देखा
है
उसे
किसी
और
कि
बाहों
में
तब
से
मैं
चैन
से
सो
नहीं
पा
रहा
उसने
क़सम
दी
थी
मुझे
कभी
न
रोने
की
रोना
तो
चाहता
हूँ,
मगर
रो
नहीं
पा
रहा
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MANOBAL GIRI
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झूठे
साथ,
झूठे
वादे
रिश्ते
को
आज़माने
तक
नशा-ए-इश्क़,
जिस्मानी
प्यार
जवानी
ख़त्म
हो
जाने
तक
टूटा
दिल,
फरेब
मोहब्बत
रास्ता
है
मय-ख़ाने
तक
बीतता
वक़्त,
खर्च
होते
सपने
मंज़िल
पे
पहुँच
जाने
तक
तिलिस्म
दुनिया,
साहिर
लोग
कब्र
के
तहखाने
तक
सुलगती
सांसें,
धड़कते
दिल
मोहब्बत
को
निभाने
तक
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MANOBAL GIRI
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बस
अधूरी
लिखी
थी
हमारी
मोहब्बत
अपने
महबूब
को
बदनाम
करने
का
इरादा
नहीं
है
तेरी
यादों
के
साए
में
रहकर
हम
जी
लेंगे
मेरी
ख़ुशी
तेरी
ख़ुशी
से
ज़्यादा
नहीं
है
कभी
हमारे
शहर
आओ
तो
बताना
मुझको
बेशक
मिलेंगे
इस
दफा,
पर
कोई
वा'दा
नहीं
है
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MANOBAL GIRI
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मुलाक़ात
कुछ
इस
कदर
हुई
उन
सेे
की
कुछ
बात
हो
न
पाई
वो
डूबी
रही
मेरी
आँखों
में
और
सारी
रात
सो
न
पाई
उनके
इश्क़
में
बेचैन
हम
रात
भर
करवटे
बदलते
रहे
वस्ल
के
इंतिज़ार
में
तमाम
रात
हम
फ़क़त
टहलते
रहे
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