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Kabir Altamash
kaise rehta hoon tere saath abhii bhi main
kaise rehta hoon tere saath abhii bhi main | कैसे रहता हूँ तेरे साथ अभी भी मैं
- Kabir Altamash
कैसे
रहता
हूँ
तेरे
साथ
अभी
भी
मैं
कोई
होता
तो
कब
का
छोड़
गया
होता
- Kabir Altamash
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धूप
भी
आराम
करती
थी
जहाँ
अपना
ऐसी
छाँव
से
नाता
रहा
Madan Mohan Danish
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किसी
ने
ख़्वाब
में
आकर
मुझे
ये
हुक्म
दिया
तुम
अपने
अश्क
भी
भेजा
करो
दु'आओं
के
साथ
Afzal Khan
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इस
से
पहले
कि
तुझे
और
सहारा
न
मिले
मैं
तिरे
साथ
हूँ
जब
तक
मिरे
जैसा
न
मिले
Afkar Alvi
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दुश्मनी
कर
मगर
उसूल
के
साथ
मुझ
पर
इतनी
सी
मेहरबानी
हो
मेरे
में'यार
का
तक़ाज़ा
है
मेरा
दुश्मन
भी
ख़ानदानी
हो
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Akhtar Shumar
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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निभाया
जिस
सेे
भी
रिश्ता
तो
फिर
हद
में
रहे
हैं
हम
किसी
के
मखमली
तकिए
के
ऊपर
सर
नहीं
रक्खा
Nirbhay Nishchhal
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तेरे
साथ
भी
मुश्किल
पड़ता
था
तेरे
बिन
तो
गुजारा
क्या
होता
गर
तू
भी
नहीं
होता
तो
न
जाने
दोस्त
हमारा
क्या
होता
Siddharth Saaz
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इस
से
पहले
कि
बिछड़
जाएँ
हम
दो
क़दम
और
मिरे
साथ
चलो
मुझ
सा
फिर
कोई
न
आएगा
यहाँ
रोक
लो
मुझको
अगर
रोक
सको
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Nasir Kazmi
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सात
टुकड़े
हुए
मेरे
दिल
के
एक
हफ़्ता
लगा
सँभलने
में
Tanoj Dadhich
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तुम
अगर
साथ
देने
का
वा'दा
करो
मैं
यूँँही
मस्त
नग़्में
लुटाता
रहूँ
तुम
मुझे
देख
कर
मुस्कुराती
रहो
मैं
तुम्हें
देख
कर
गीत
गाता
रहूँ
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Sahir Ludhianvi
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मैं
ख़ुद
नहीं
जानता
था
ऐ
प्यारे
दोस्त
मैं
ख़ुद-कुशी
की
तरफ़
जाऊँगा
कभी
Kabir Altamash
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आ
गया
फिर
से
प्यार
का
मौसम
मेरा
मतलब
बहार
का
मौसम
इक
तो
अपना
बिहार
अच्छा
है
उसपे
अपने
बिहार
का
मौसम
ख़त्म
हो
जाऊँगा
वगरना
मैं
ख़त्म
कर
इंतज़ार
का
मौसम
याद
है
हम
मिले
कहाँ
पर
थे
याद
है
सोमवार
का
मौसम
हम
कभी
एक
साथ
थे
है
ना
था
कभी
ऐतबार
का
मौसम
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Kabir Altamash
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तुम
सब
कहते
हो
दीवाना
मुझको
कैसा
दीवाना
समझाना
मुझको
मुझको
बर्बाद
करो
मालिक
फिर
से
फिर
से
है
रोना
पछताना
मुझको
दुनिया
में
तुम
ही
सब
कुछ
थोड़ी
हो
अब
और
बहुत
कुछ
है
पाना
मुझको
दम
घुटता
है
मेरा
मेरे
घर
में
तुम
जब
आओ
तो
ले
जाना
मुझको
जो
अब
शाइर
है
तेरा
'आशिक़
था
ऐ
लड़की
तू
ने
पहचाना
मुझको
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Kabir Altamash
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दे
रहा
है
वो
रास्ता
मुझको
यानी
इक
और
हादसा
मुझको
तुझको
मैं
चाहता
हूँ
ऐ
लड़की
चाहती
क्या
है
तू
बता
मुझको
तुझको
प्यारा
है
एक
इक
शायर
और
बस
जौन
एलिया
मुझको
अब
भला
मैं
कहाँ
छुपूँ
जाकर
ढूँढ़
लेता
है
सानेहा
मुझको
छोड़
दूँगा
तुझे
भी
मैं
इक
दिन
छोड़ने
का
है
तजरबा
मुझको
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Kabir Altamash
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बातें
दिल
की
उछाल
देना
तुम
दिल
से
शिकवे
निकाल
देना
तुम
कोई
जो
पूछे
ये
वफ़ा
क्या
है
तो
हमारी
मिसाल
देना
तुम
शे'र
तो
मेरे
यूँँ
हो
जाएँगे
ज़ेहन
को
बस
ख़याल
देना
तुम
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Kabir Altamash
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