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Kabir Altamash
aa gaya phir se pyaar ka mausam
aa gaya phir se pyaar ka mausam | आ गया फिर से प्यार का मौसम
- Kabir Altamash
आ
गया
फिर
से
प्यार
का
मौसम
मेरा
मतलब
बहार
का
मौसम
इक
तो
अपना
बिहार
अच्छा
है
उसपे
अपने
बिहार
का
मौसम
ख़त्म
हो
जाऊँगा
वगरना
मैं
ख़त्म
कर
इंतज़ार
का
मौसम
याद
है
हम
मिले
कहाँ
पर
थे
याद
है
सोमवार
का
मौसम
हम
कभी
एक
साथ
थे
है
ना
था
कभी
ऐतबार
का
मौसम
- Kabir Altamash
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मुझ
पर
निगाह-ए-नाज़
का
जब
जादू
चल
गया
मैं
रफ़्ता
रफ़्ता
क़ैस
की
सोहबत
में
ढल
गया
ज़ुल्फें
उन्होंने
खोल
के
बिखराई
थी
शजर
फिर
देखते
ही
देखते
मौसम
बदल
गया
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Shajar Abbas
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तुम्हारे
पाँव
क़सम
से
बहुत
ही
प्यारे
हैं
ख़ुदा
करे
मेरे
बच्चों
की
इन
में
जन्नत
हो
Rafi Raza
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झुके
तो
जन्नत
उठे
तो
ख़ंजर
करेंगी
हम
को
तबाह
आँखें
Parul Singh "Noor"
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मैं
हूँ
सदियों
से
भटकता
हुआ
प्यासा
दरिया
ऐ
ख़ुदा
कुछ
तो
समुंदर
के
सिवा
दे
मुझ
को
Afzal Ali Afzal
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हम
को
मालूम
है
जन्नत
की
हक़ीक़त
लेकिन
दिल
के
ख़ुश
रखने
को
'ग़ालिब'
ये
ख़याल
अच्छा
है
Mirza Ghalib
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नहीं
हर
चंद
किसी
गुम-शुदा
जन्नत
की
तलाश
इक
न
इक
ख़ुल्द-ए-तरब-नाक
का
अरमाँ
है
ज़रूर
बज़्म-ए-दोशंबा
की
हसरत
तो
नहीं
है
मुझ
को
मेरी
नज़रों
में
कोई
और
शबिस्ताँ
है
ज़रूर
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Asrar Ul Haq Majaz
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इक
और
दरिया
का
सामना
था
'मुनीर'
मुझ
को
मैं
एक
दरिया
के
पार
उतरा
तो
मैंने
देखा
Muneer Niyazi
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बदल
गए
मेरे
मौसम
तो
यार
अब
आए
ग़मों
ने
चाट
लिया
ग़म-गुसार
अब
आए
Farhat Abbas Shah
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शब
बसर
करनी
है,
महफ़ूज़
ठिकाना
है
कोई
कोई
जंगल
है
यहाँ
पास
में
?
सहरा
है
कोई
?
Umair Najmi
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चाँद
चेहरा
ज़ुल्फ़
दरिया
बात
ख़ुशबू
दिल
चमन
इक
तुम्हें
दे
कर
ख़ुदा
ने
दे
दिया
क्या
क्या
मुझे
Bashir Badr
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दे
रहा
है
वो
रास्ता
मुझको
यानी
इक
और
हादसा
मुझको
तुझको
मैं
चाहता
हूँ
ऐ
लड़की
चाहती
क्या
है
तू
बता
मुझको
तुझको
प्यारा
है
एक
इक
शायर
और
बस
जौन
एलिया
मुझको
अब
भला
मैं
कहाँ
छुपूँ
जाकर
ढूँढ़
लेता
है
सानेहा
मुझको
छोड़
दूँगा
तुझे
भी
मैं
इक
दिन
छोड़ने
का
है
तजरबा
मुझको
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Kabir Altamash
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थक
गए
हम
ज़िंदगी
से
जी
रहे
हैं
बेबसी
से
अब
पढ़ाई
ही
करूँगा
भर
गया
मन
आशिक़ी
से
दोस्त
तुम
सेे
पूछना
था
कुछ
मिला
क्या
दुश्मनी
से
हूँ
अकेला
ज़िंदगी
में
मुझको
क्या
है
फ़रवरी
से
जल
रहे
हैं
अबके
सारे
आदमी
ही
आदमी
से
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Kabir Altamash
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इक
बेचैनी
सी
है
मन
में
क्या
होगा
ये
रब
जाने
यार
मिरे
कोई
पूछो
रब
से
वो
तो
है
सब
जाने
Kabir Altamash
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देखने
वाले
मिरी
आँखों
का
जादू
देखते
हैं
आप
ही
हैं
जो
मिरी
आँखों
का
आँसू
देखते
हैं
पूछते
हैं
वो
कि
क्या
क्या
देखते
हो
'अल्तमश'
तुम
हम
कभी
उसको
कभी
बस
उसके
गेसू
देखते
हैं
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Kabir Altamash
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दोस्त
गर
तू
पलट
नहीं
सकता
मैं
भी
तुझ
सेे
लिपट
नहीं
सकता
यार
वो
ख़ुद-कुशी
न
कर
ले
कहीं
यार
मैं
पीछे
हट
नहीं
सकता
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Kabir Altamash
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