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Kabir Altamash
thak ga.e ham zindagi se
thak ga.e ham zindagi se | थक गए हम ज़िंदगी से
- Kabir Altamash
थक
गए
हम
ज़िंदगी
से
जी
रहे
हैं
बेबसी
से
अब
पढ़ाई
ही
करूँगा
भर
गया
मन
आशिक़ी
से
दोस्त
तुम
सेे
पूछना
था
कुछ
मिला
क्या
दुश्मनी
से
हूँ
अकेला
ज़िंदगी
में
मुझको
क्या
है
फ़रवरी
से
जल
रहे
हैं
अबके
सारे
आदमी
ही
आदमी
से
- Kabir Altamash
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मुझ
सेे
पहले
कोई
रंग
लगाए
उनको
कैसे
सह
लें
यार
भला
ये
होली
में
हम
Priya Dixit
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कुछ
तो
कर
आदाब-ए-महफ़िल
का
लिहाज़
यार
ये
पहलू
बदलना
छोड़
दे
Waseem Barelvi
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बहुत
चल
बसे
यार
ऐ
ज़िंदगी
कोई
दिन
की
मेहमान
तू
रह
गई
Dagh Dehlvi
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एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
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अब
उस
सेे
दोस्ती
है
जिस
सेे
कल
मुहब्बत
थी
अब
इस
सेे
ज़्यादा
बुरा
वक़्त
कुछ
नहीं
है
दोस्त
Vishal Singh Tabish
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मैं
दिल
को
सख़्त
करके
उस
गली
जा
तो
रहा
हूँ
दोस्त
करूँँगा
क्या
अगर
वो
ही
शरारत
पर
उतर
आया
Harsh saxena
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भले
ही
प्यार
हो
या
हिज्र
हो
या
फिर
सियासत
हो
कुछ
ऐसे
दोस्त
थे
हर
बात
पर
अश'आर
कहते
थे
Siddharth Saaz
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मेरा
हर
दिन
तेरी
फ़ुर्क़त
में
बसर
होता
है
यार
होना
तो
नहीं
चाहिए,
पर
होता
है
Harman Dinesh
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यार
इक
बार
परिंदों
को
हुकूमत
दे
दो
ये
किसी
शहर
को
मक़्तल
नहीं
होने
देंगे
ये
जो
चेहरे
हैं
यहाँ
चाँद
से
चेहरे
'ताबिश'
ये
मिरा
इश्क़
मुकम्मल
नहीं
होने
देंगे
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Abbas Tabish
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शाम
ढलने
से
फ़क़त
शाम
नहीं
ढलती
है
उम्र
ढल
जाती
है
जल्दी
पलट
आना
मेरे
दोस्त
Ashfaq Nasir
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किसी
को
भेज
मेरे
पास
मेरे
रब
कि
तू
तो
जानता
है
ना
मैं
तन्हा
हूँ
Kabir Altamash
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देखने
वाले
मिरी
आँखों
का
जादू
देखते
हैं
आप
ही
हैं
जो
मिरी
आँखों
का
आँसू
देखते
हैं
पूछते
हैं
वो
कि
क्या
क्या
देखते
हो
'अल्तमश'
तुम
हम
कभी
उसको
कभी
बस
उसके
गेसू
देखते
हैं
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Kabir Altamash
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सब
सेे
पहले
मैं
आँखें
देखूँगा
तब
जा
कर
उनकी
बाहें
देखूँगा
मेरी
ग़ज़लें
ख़ारिज
करने
वाले
मैं
भी
अब
तेरी
ग़ज़लें
देखूंँगा
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Kabir Altamash
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उठेंगे
हम
नहीं
सजदे
से
तब
तलक
या
रब
ये
सारे
मस'अले
जब
तक
के
हल
नहीं
होंगे
Kabir Altamash
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जब
तेरे
बच्चे
मेरी
नज़्म
सुनाएंगे
तुझको
तब
तू
समझेगी
तूने
क्या
खोया
था
ऐ
लड़की
Kabir Altamash
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