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Kabir Altamash
abboo ne bhi batlaaya tha ye duniya zalim hai
abboo ne bhi batlaaya tha ye duniya zalim hai | अब्बू ने भी बतलाया था ये दुनिया ज़ालिम है
- Kabir Altamash
अब्बू
ने
भी
बतलाया
था
ये
दुनिया
ज़ालिम
है
कहना
उनका
गर
माना
होता
तो
अच्छा
होता
- Kabir Altamash
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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ये
कब
कहती
हूँ
तुम
मेरे
गले
का
हार
हो
जाओ
वहीं
से
लौट
जाना
तुम
जहाँ
बेज़ार
हो
जाओ
Parveen Shakir
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जब
आ
जाती
है
दुनिया
घूम
फिर
कर
अपने
मरकज़
पर
तो
वापस
लौट
कर
गुज़रे
ज़माने
क्यूँँ
नहीं
आते
Ibrat Machlishahri
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जहाँ
से
जी
न
लगे
तुम
वहीं
बिछड़
जाना
मगर
ख़ुदा
के
लिए
बे-वफ़ाई
न
करना
Munawwar Rana
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मेरे
होंटों
पे
अपनी
प्यास
रख
दो
और
फिर
सोचो
कि
इस
के
बा'द
भी
दुनिया
में
कुछ
पाना
ज़रूरी
है
Waseem Barelvi
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ये
जितने
मसाइल
हैं
दुनिया
में,
सब
तुझे
देखने
से
सुलझ
जाएँगे
Siddharth Saaz
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हो
गए
राम
जो
तुम
ग़ैर
से
ए
जान-ए-जहाँ
जल
रही
है
दिल-ए-पुर-नूर
की
लंका
देखो
Kalb-E-Hussain Nadir
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सुतून-ए-दार
पे
रखते
चलो
सरों
के
चराग़
जहाँ
तलक
ये
सितम
की
सियाह
रात
चले
Majrooh Sultanpuri
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हम
क्या
करें
अगर
न
तिरी
आरज़ू
करें
दुनिया
में
और
भी
कोई
तेरे
सिवा
है
क्या
Hasrat Mohani
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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तुम
सेे
मिल
कर
ये
कहना
है
मुझको
साथ
तुम्हारे
ही
रहना
है
मुझको
एक
नदी
हो
तुम
उस
गंगा
जैसी
तुझ
में
अब
घुल
कर
बहना
है
मुझको
बाद
तुम्हारे
मैं
मरने
जाऊँगा
बाद
तुम्हारे
क्यूँ
रहना
है
मुझको
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Kabir Altamash
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कितने
ग़म
हैं
यार
मुझे
अब
कौन
करेगा
प्यार
मुझे
अब
कोई
करता
था
ठीक
मुझे
करता
है
बीमार
मुझे
अब
मैं
हूँ
ना,
सब
कहते
थे
कहते
हैं
लाचार
मुझे
अब
तारीफ
सुनी
जिन
कानों
ने
सुनती
हैं
बेकार
मुझे
अब
छोड़ा
था
कभी
मैंने
घर
को
छोड़
दिया
घर
-
बार
मुझे
अब
लगता
था
सब
अपने
ही
हैं
लगते
हैं
मक्कार
मुझे
अब
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Kabir Altamash
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मेरे
पास
तुम्हारे
जैसी
बस
इक
तुम
हो
अच्छे
सब
हैं
सब
सेे
अच्छी
बस
इक
तुम
हो
कहने
को
दुनिया
में
सारे
हैं
अपने
ही
लेकिन
सच
पूछो
तो
अपनी
बस
इक
तुम
हो
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Kabir Altamash
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आपका
कहना
तो
ठीक
है
दोस्त
पर
बे-वफ़ा
है
वो
दिल
मानता
क्यूँ
नहीं
Kabir Altamash
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अब
उसको
भी
मेरी
आदत
है
बोल
रहा
था
जो
तू
आफ़त
है
ढूंढ
रहे
हैं
अब
भी
उनको
हम
जिनका
दिखना
यार
क़यामत
है
जिस
सेे
मुझको
यार
मोहब्बत
थी
उस
सेे
क्यूँ
मुझको
अब
नफ़रत
है
देखा
माँ
के
क़दमों
के
नीचे
नीचे
सचमुच
में
इक
जन्नत
है
इस
दुनिया
में
इक
ही
लड़की
है
जिसपर
दुनिया
भर
की
लानत
है
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Kabir Altamash
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