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Kabir Altamash
aapka kehna to theek hai dost par
aapka kehna to theek hai dost par | आपका कहना तो ठीक है दोस्त पर
- Kabir Altamash
आपका
कहना
तो
ठीक
है
दोस्त
पर
बे-वफ़ा
है
वो
दिल
मानता
क्यूँ
नहीं
- Kabir Altamash
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अव्वल
तो
तेरी
दोस्ती
पर
शक
नहीं
कोई
और
दूसरा
ये
मुझको
तेरे
राज़
पता
हैं
Tanoj Dadhich
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ख़ुद
को
शीशा
कर
लिया
है
यार
मैंने
अब
तो
तेरा
देखना
बनता
है
मुझ
को
Neeraj Neer
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एक
आवाज़
कि
जो
मुझको
बचा
लेती
है
ज़िन्दगी
आख़री
लम्हों
में
मना
लेती
है
जिस
पे
मरती
हो
उसे
मुड़
के
नहीं
देखती
वो
और
जिसे
मारना
हो
यार
बना
लेती
है
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Ali Zaryoun
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मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
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Nirvesh Navodayan
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फ़ुज़ूल-ख़र्ची
नहीं
करेंगे
Rehman Faris
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बस
एक
ही
दोस्त
है
दुनिया
में
अपना
मगर
उस
से
भी
झगड़ा
चल
रहा
है
Zubair Ali Tabish
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दाग़
दुनिया
ने
दिए
ज़ख़्म
ज़माने
से
मिले
हम
को
तोहफ़े
ये
तुम्हें
दोस्त
बनाने
से
मिले
Kaif Bhopali
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अब
कारगह-ए-दहर
में
लगता
है
बहुत
दिल
ऐ
दोस्त
कहीं
ये
भी
तिरा
ग़म
तो
नहीं
है
Majrooh Sultanpuri
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दोस्ती
और
किसी
ग़रज़
के
लिए
वो
तिजारत
है
दोस्ती
ही
नहीं
Ismail Merathi
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यूँँ
लगे
दोस्त
तिरा
मुझ
से
ख़फ़ा
हो
जाना
जिस
तरह
फूल
से
ख़ुशबू
का
जुदा
हो
जाना
Qateel Shifai
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कुछ
ऐसे
भी
होते
होंगे
जो
हरदम
बस
रोते
होंगे
चैन
न
उसको
आता
होगा
जाने
कैसे
सोते
होंगे
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Kabir Altamash
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तुम
सब
कहते
हो
दीवाना
मुझको
कैसा
दीवाना
समझाना
मुझको
मुझको
बर्बाद
करो
मालिक
फिर
से
फिर
से
है
रोना
पछताना
मुझको
दुनिया
में
तुम
ही
सब
कुछ
थोड़ी
हो
अब
और
बहुत
कुछ
है
पाना
मुझको
दम
घुटता
है
मेरा
मेरे
घर
में
तुम
जब
आओ
तो
ले
जाना
मुझको
जो
अब
शाइर
है
तेरा
'आशिक़
था
ऐ
लड़की
तू
ने
पहचाना
मुझको
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Kabir Altamash
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इंसान
से
ज़ियादा
कोई
हैवान
नहीं
है
अब
तो
इंसानों
में
ही
इंसान
नहीं
है
रेप
किया
था
कल
जिसने
कोई
लड़की
का
वो
दरिंदा
है
,
हिन्दू
या
मुसलमान
नहीं
है
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Kabir Altamash
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खा
जाएगा
इक
दिन
मुझे
तुझ
सेे
बिछड़ने
का
ये
डर
Kabir Altamash
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इक
दिन
तुम
रोओगी
घर
वाले
भी
रोएँगे
अपने
तो
अपने
बाहर
वाले
भी
रोएँगे
तुझको
मालूम
नहीं
लेकिन
तेरे
मरने
पर
नौकर
रोएगा
दफ़्तर
वाले
भी
रोएँगे
तुम
अब
के
और
ख़ुतूत
नहीं
भेजोगे
तो
फिर
ऐ
मेरे
यार
कबूतर
वाले
भी
रोएँगे
तुम
मुझको
रोने
पर
मजबूर
कभी
मत
करना
मैं
रोया
तो
मेरे
घर
वाले
भी
रोएँगे
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Kabir Altamash
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