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Kabir Altamash
kuchh aise bhi hote honge
kuchh aise bhi hote honge | कुछ ऐसे भी होते होंगे
- Kabir Altamash
कुछ
ऐसे
भी
होते
होंगे
जो
हरदम
बस
रोते
होंगे
चैन
न
उसको
आता
होगा
जाने
कैसे
सोते
होंगे
- Kabir Altamash
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हमारी
मौत
पर
बेशक़
ज़माना
आएगा
रोने
मगर
ज़िंदा
हैं
जब
तक
चैन
से
जीने
नहीं
देगा
Astitwa Ankur
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तुम
न
आए
तो
क्या
सहर
न
हुई
हाँ
मगर
चैन
से
बसर
न
हुई
मेरा
नाला
सुना
ज़माने
ने
एक
तुम
हो
जिसे
ख़बर
न
हुई
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Mirza Ghalib
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ये
मुझे
चैन
क्यूँँॅं
नहीं
पड़ता
एक
ही
शख़्स
था
जहान
में
क्या
Jaun Elia
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ये
कहते
हो
तिरे
जाने
से
दिल
को
चैन
आएगा
तो
जाता
हूँ,
ख़ुदा
हाफ़िज़!
मगर
तुम
झूठ
कहते
हो
Zubair Ali Tabish
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उसूली
तौर
पे
मर
जाना
चाहिए
था
मगर
मुझे
सुकून
मिला
है
तुझे
जुदा
कर
के
Ali Zaryoun
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सिवाए
तालियों
के
कुछ
नहीं
मिलता
ग़ज़लगोई
फ़क़त
धंधा
सुकूँ
का
है
Neeraj Neer
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ऐ
मिरी
ज़ात
के
सुकूँ
आ
जा
थम
न
जाए
कहीं
जुनूँ
आ
जा
इस
से
पहले
कि
मैं
अज़िय्यत
में
अपनी
आँखों
को
नोच
लूँ
आ
जा
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Fareeha Naqvi
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बे
तेरे
क्या
वहशत
हम
को
तुझ
बिन
कैसा
सब्र-ओ-सुकूँ
तू
ही
अपना
शहर
है
जानी
तू
ही
अपना
सहरा
है
Ibn E Insha
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'इंशा'-जी
उठो
अब
कूच
करो
इस
शहर
में
जी
को
लगाना
क्या
वहशी
को
सुकूँ
से
क्या
मतलब
जोगी
का
नगर
में
ठिकाना
क्या
Ibn E Insha
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पहले
लगा
था
हिज्र
में
जाएँगे
जान
से
पर
जी
रहे
हैं
और
भी
हम
इत्मीनान
से
Ankit Maurya
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तुमको
देखा
तो
ये
मालूम
हुआ
मुझको
तुम
सेे
मिलती
आई
है
यार
हवा
मुझको
अब
मैं
क्योंकर
न
उदास
रहूँ
यारों
बोलो
मैंने
जिसको
चाहा
वो
छोड़
गया
मुझको
मुझको
क्या
लेना
उस
रब
से
जो
सबका
है
बस
तुम
ही
लगते
हो
अब
यार
ख़ुदा
मुझको
एक
तरफ़
दुनिया
थी
और
एक
तरफ़
मैं
थी
उस
शहज़ादे
ने
अपने
आप
चुना
मुझको
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Kabir Altamash
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सब
लड़कों
में
सब
सेे
अच्छा
लड़का
मैं
हूँ
एक
अनोखा
प्यारा
लड़का
अम्मी
ख़ुश
होकर
सब
सेे
कहती
थी
देखो
दौड़
रहा
है
मेरा
लड़का
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Kabir Altamash
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कितने
ग़म
हैं
यार
मुझे
अब
कौन
करेगा
प्यार
मुझे
अब
कोई
करता
था
ठीक
मुझे
करता
है
बीमार
मुझे
अब
मैं
हूँ
ना,
सब
कहते
थे
कहते
हैं
लाचार
मुझे
अब
तारीफ
सुनी
जिन
कानों
ने
सुनती
हैं
बेकार
मुझे
अब
छोड़ा
था
कभी
मैंने
घर
को
छोड़
दिया
घर
-
बार
मुझे
अब
लगता
था
सब
अपने
ही
हैं
लगते
हैं
मक्कार
मुझे
अब
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Kabir Altamash
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हम
दोनों
मिल
कर
इक
झगड़े
को
खींच
रहे
हैं
मतलब
हम
दोनों
इस
रिश्ते
को
खींच
रहे
हैं
डूब
गया
था
जो
बरसों
पहले
घर
वो
अपना
अब
उस
घर
के
हर
इक
मलबे
को
खींच
रहे
हैं
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Kabir Altamash
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तुम
सब
कहते
हो
दीवाना
मुझको
कैसा
दीवाना
समझाना
मुझको
मुझको
बर्बाद
करो
मालिक
फिर
से
फिर
से
है
रोना
पछताना
मुझको
दुनिया
में
तुम
ही
सब
कुछ
थोड़ी
हो
अब
और
बहुत
कुछ
है
पाना
मुझको
दम
घुटता
है
मेरा
मेरे
घर
में
तुम
जब
आओ
तो
ले
जाना
मुझको
जो
अब
शाइर
है
तेरा
'आशिक़
था
ऐ
लड़की
तू
ने
पहचाना
मुझको
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Kabir Altamash
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