zindagi ham ne zyaada to dekhi nahin | ज़िंदगी हम ने ज़्यादा तो देखी नहीं

  - Harsh Kumar Bhatnagar
ज़िंदगीहमनेज़्यादातोदेखीनहीं
रोटीतोदेखीपरदेखीचक्कीनहीं
शाख़सेपत्तागिरतातोदेखाहैपर
पेड़कीजड़कभीमैंनेदेखीनहीं
कैसेमालूमहोगीतलबभूखकी
मैंनेखाईकभीसूखीरोटीनहीं
येमिराग़मतोइतनाबड़ाग़मनहीं
जबतलकयेमिरीआँखेंरोतीनहीं
प्यारमेंअंधाभीहोकेदेखाहैपर
मैंनेचिट्ठीजलाकरकेदेखीनहीं
छोड़जानाकिसीकाज़रूरीहैगर
वोजाएतोफिरशा'इरीहीनहीं
हैलियाठानगरदूरजानासोअब
मैंभीतेरानहींऔरतूमेरीनहीं
कैसेआसानीसेभूलजातेहैंसब
परतूतोमेरेदिलसेगईहीनहीं
  - Harsh Kumar Bhatnagar
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