kashtii ko dar nahin koii lehron ke saamne | कश्ती को डर नहीं कोई लहरों के सामने

  - Harsh Kumar Bhatnagar
कश्तीकोडरनहींकोईलहरोंकेसामने
हमसरउठाएबैठेहैंनेज़ोंकेसामने
अंदरसेतोड़देगाउसेजबअनाकाशौक़
रोनेलगेगातबवोशिवालोंकेसामने
आँसूनिकलतेहीनहींआगेपिताकेबस
रोलेतेइसलिएभीहैंमाॅंओंकेसामने
तस्वीरहीबचीहैमिरेपासइकतिरी
सोताहूँरोज़रखकेमैंआँखोंकेसामने
राजातोमय-कशीमेंहैमसरूफ़आजकल
रानीकाग़मखुलाहैकनीज़ोंकेसामने
गुल्लकमेंदबकेमरगएकितनेजानेख़्वाब
इकयादहीबचीहैनिगाहोंकेसामने
गरहैख़ुदाकासाथतोकिसबातकाहैडर
काफ़ीहैइकबशरभीहज़ारोंकेसामने
हालातज़िंदगीमेंबदलतेरहेंगेपर
सबठीकहीबतानातूबच्चोंकेसामने
मंज़िलकीओरचलपड़ेजबभीकोईग़ज़ल
सदक़ानिकालदेनाफ़क़ीरोंकेसामने
  - Harsh Kumar Bhatnagar
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