mere andar jaise koi thanda sehra jalta hai | मेरे अंदर जैसे कोई ठंडा सहरा जलता है

  - Madhurima Singh
मेरेअंदरजैसेकोईठंडासहराजलताहै
आहटआहटयूँँलगताहैमुझमेंकोईचलताहै
मैंनेतोदेहरीपरबैठेबैठेरातगुज़ारीहै
मेरेबिस्तरपरफिरतन्हाकरवटकौनबदलताहै
आगहवनकीतेज़हैइतनीसारेमंत्रभुलादेगी
इसवेदीपरसीधावालाहाथहमेशाजलताहै
इसनगरीमेंकाँचकेटुकड़ेपत्थरकाँटेबिखरेहैं
ध्यानसेचलनाइसनगरीमेंअक्सरपाँवफिसलताहै
तेज़आँचमेंजलकरचूड़ीसतरंगीबनजातीहै
मेरीसाँसोंकाशीशाभीकितनेरंगबदलताहै
वोचाहेतोहाथबढ़ाकरघरकेअंदरलेजाए
उसकेदरपरगिरनेवालाख़ुदसेकहाँसँभलताहै
चाँदकेआँसूशबनमबनकरधरतीकेसीनेपरहैं
सूरजकीआहोंसेजैसेबर्फ़कादरियागलताहै
  - Madhurima Singh
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