bahut hain zindagi men gham suno KHaamosh kyuuñ ho tum | बहुत हैं ज़िंदगी में ग़म सुनो ख़ामोश क्यूँ हो तुम

  - Madhurima Singh
बहुतहैंज़िंदगीमेंग़मसुनोख़ामोशक्यूँहोतुम
तुम्हारेरू-ब-रूहैंहमसुनोख़ामोशक्यूँहोतुम
तुम्हारीख़ामुशीपरबसहमारीजानजातीहै
हमारीज़िंदगीहैकमसुनोख़ामोशक्यूँहोतुम
कहाथातुमनेआँखोंमेंयेदुनियाभूलजाओगे
तुम्हेंक्याख़ौफ़हैहरदमसुनोख़ामोशक्यूँहोतुम
हमेंदेदोउदासीआँखमेंकबतकछुपाओगे
बनादेंगेइसेशबनमसुनोख़ामोशक्यूँहोतुम
सजाकरचाँदकागजरायेपगलीरातआतीहै
बिखरतीसाँसकीसरगमसुनोख़ामोशक्यूँहोतुम
लहरातेगुल-मोहरपरयेउतरतीसाँझठहरीहै
बदलजाएयेमौसमसुनोख़ामोशक्यूँहोतुम
फ़सानादिलकाकहलोआजजानेकबमिलेंहमतुम
चराग़ोंमेंअभीहैदमसुनोख़ामोशक्यूँहोतुम
  - Madhurima Singh
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