jidhar bhi dekho wahin nazar men tanhaaii | जिधर भी देखो वहीं नज़र में तन्हाई

  - Madho Kaushik
जिधरभीदेखोवहींनज़रमेंतन्हाई
फैलागईहैपूरेघरमेंतन्हाई
भीड़बहुतहैलेकिनमुझकोलगताहै
सिर्फ़चलेगीसाथसफ़रमेंतन्हाई
आनेवालीपीढ़ीकीक़िस्मतदेखो
उन्हेंमिलेंगेनगरनगरमेंतन्हाई
पत्तेभीहिलतेहैंपरख़ामोशीसे
ढूँडरहीहैहवाशजरमेंतन्हाई
मनकाख़ाली-पनख़ालीहैकुछइतना
दिलभीतन्हाऔरजिगरमेंतन्हाई
तन्हाईसेडरजानेकाग़मकैसा
मुश्किलसेमिलतीहैघरमेंतन्हाई
  - Madho Kaushik
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