kyuuñ shor machaate ho be-kaar men pahle se | क्यूँ शोर मचाते हो बे-कार में पहले से

  - Madho Kaushik
क्यूँशोरमचातेहोबे-कारमेंपहलेसे
जबझूटहीछपताहैअख़बारमेंपहलेसे
होताहैयहीसबकुछसंसारमेंपहलेसे
बिकतीहैमोहब्बतभीबाज़ारमेंपहलेसे
हमलोगसमझतेथेकिहमहैंयहाँअव्वल
कुछलोगचुनेपाएदीवारमेंपहलेसे
बसहाथसेछूनेपरमहसूसतुम्हेंहोगा
सोयाहैकोईदरियाअंगारमेंपहलेसे
फैलातोलहरबनकरआकाशकोछूआया
क़तराहीसमुंदरथाआकारमेंपहलेसे
दुनियाकेसभीपर्वतक्यारोकसकेउसको
आवाज़हीरहतीहैरफ़्तारमेंपहलेसे
हालातहवाबनकरशो'लेमेंबदलतेहैं
इकआगतोहोतीहैफ़न-कारमेंपहलेसे
  - Madho Kaushik
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