gham-e-jaanaan gham-e-dauraan bahut hain gham zamaane men | ग़म-ए-जानाँ ग़म-ए-दौराँ बहुत हैं ग़म ज़माने में

  - Maaham Shah
ग़म-ए-जानाँग़म-ए-दौराँबहुतहैंग़मज़मानेमें
मगरजोग़मकोअपनाएबहुतहैंकमज़मानेमें
ख़ुदहीअपनापतारक्खोख़ुदहीअपनीख़बररक्खो
सभीमद्धमसभीबातिनसभीमुबहमज़मानेमें
मैंकिसकोक्याकहूँमासूमहैंसारेब-ज़ाहिरतो
बदलजाताहैलेकिनदफ़अ'तनमौसमज़मानेमें
करोवा'दाकितुमआओगेइसमहफ़िलकोजाँदेने
सजाएँगेकभीजोदिलकीमहफ़िलहमज़मानेमें
  - Maaham Shah
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