क्यासुनाऊँदिल-ए-मुज़्तरकाफ़सानातुमको
मैंनेचाहाथाकभीएकज़मानातुमको
येजोतुमईदपेभीआतेनहींलौटकेघर
कोईछुट्टीकानहींहोताबहानातुमको
बिस्तर-ए-मर्गपेमाँथीतोनथेसामनेतुम
बहुतहीमहँगापड़ाहैचलेजानातुमको
गाँवकेकच्चेमकानोंमेंयेपक्केरिश्ते
रासआएगानहींशहरकाखानातुमको
हरमहीनेयेनएनोटयेख़तक्यामतलब
नमनाओनहींआताहैमनानातुमको
एककमराहैकिराएकायेबाज़ारीग़िज़ा
शहरमेंकैसेमिलेशाहीठिकानातुमको
आख़िरीख़तकोपढ़ोउसमेंमिलेगा'माहम'
भूलजानेकाउसेकोईबहानातुमको