rasm hai ye duniya ki khel hai ye qismat ka | रस्म है ये दुनिया की खेल है ये क़िस्मत का

  - Maaham Shah
रस्महैयेदुनियाकीखेलहैयेक़िस्मतका
चाहतेजिसेहमहैंवोनहींहैचाहतका
जिसनेहिज्रकाटाहैबसवोजानसकताहै
ज़ख़्मसिलनहींसकतादर्दहैवोशिद्दतका
आँखमरतोजातीहैजीनेकीतमन्नामें
औरवोनहींमरताजोहैख़्वाबहसरतका
जोलिखालकीरोंमेंउसकोपूराहोनाहै
वक़्तटलनहींसकताहरघड़ीमुसीबतका
सिर्फ़क़स्मेंवा'देहैंऔरवक़्तपड़नेपर
साथभीनहींदेताअबकोईमोहब्बतका
  - Maaham Shah
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