dard-e-dil kaun aazmaata hai | दर्द-ए-दिल कौन आज़माता है

  - Maaham Shah
दर्द-ए-दिलकौनआज़माताहै
कौनबे-चैनियाँबढ़ाताहै
रातभरजागतेरहेहोतुम
जानेक्याग़मतुम्हेंसताताहै
हँसतेहँसतेजोरोनेलगतेहो
कुछकहोकौनयादआताहै
जिसनुजूमीनेथीहथेलीपढ़ी
क्यामुक़द्दरभीवोजगाताहै
जिसेकरनाहोकोईवादा-वफ़ा
तोवोफिरलौटकरभीआताहै
कूचा-ए-हुस्नतोगयासालिम
परयेदिलटूटकरहीआताहै
मानलेतीहूँउसकाकहनाभी
जानेफिररूठकेक्यूँजाताहै
  - Maaham Shah
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