charaaghon ko bujh | चराग़ों को बुझाना चाहता है

  - M. Nasrullah Nasr
चराग़ोंकोबुझानाचाहताहै
अँधेरामुस्कुरानाचाहताहै
सलामतपरनहींहैंजिसकेदेखो
वोतारेतोड़लानाचाहताहै
तिरीआँखोंकाकजरारीयेख़ंजर
मिरेदिलकानिशानाचाहताहै
वोआनाचाहताहैमेरेदिलमें
मगरकोईबहानाचाहताहै
बहुतरोयाहैदौर-ए-बेबसीमें
मगरअबमुस्कुरानाचाहताहै
कोईसुनतानहींहै'नस्र'उसकी
वोहाल-ए-ग़मसुनानाचाहताहै
  - M. Nasrullah Nasr
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