kahii manzil kahii rastaa puraana chhoot jaata hai | कहीं मंज़िल कहीं रस्ता पुराना छूट जाता है

  - M. Nasrullah Nasr
कहींमंज़िलकहींरस्तापुरानाछूटजाताहै
सफ़रमेंज़ीस्तकेमंज़रसुहानाछूटजाताहै
रक़ाबतकासबबबनताहैअक्सररोज़कामिलना
ज़रासीबातपेमिलना-मिलानाछूटजाताहै
बहुतअफ़्सोसहोताहैज़ईफ़ीमेंबुज़ुर्गोंको
जवाँबेटेकाजबमज़बूतशानाछूटजाताहै
यहीदस्तूर-ए-फ़ितरतहैख़िज़ाँकेदौरमेंअक्सर
शजरकेहाथसेपत्तापुरानाछूटजाताहै
समझलीजेअजलकाहम-सफ़रहैवोबशरअबतो
बहुतपहलेसेजिसकाआब-ओ-दानाछूटजाताहै
सफ़रमेंहम-सफ़रमिलजाएजिसकोचाँदकाटुकड़ा
फिरउससेदोस्तक्यासाराज़मानाछूटजाताहै
मता-ए-दहरपर'नस्र'इतनानाज़क्याकरना
अदमकीराहमेंसाराख़ज़ानाछूटजाताहै
  - M. Nasrullah Nasr
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