dil ko shohrat ka talabgaar na hone deeje | दिल को शोहरत का तलबगार न होने दीजे

  - M. Nasrullah Nasr
दिलकोशोहरतकातलबगारहोनेदीजे
ख़ुदकोरुस्वासर-ए-बाज़ारहोनेदीजे
फ़ाक़ाकरलीजिएइसशहर-ए-जफ़ामेंलेकिन
ख़मअनाकीकभीदस्तारहोनेदीजे
जिसकीता'मीरमेंअस्लाफ़काख़ूँशामिलहो
उसहवेलीकोतोमिस्मारहोनेदीजे
गुफ़्तुगूमेंभीरहेहुस्न-ए-तकल्लुमकाख़याल
औरलहजेकोभीतलवारहोनेदीजे
वक़्तसेक़ीमतीदुनियामेंकोईचीज़नहीं
कोईपलज़ीस्तकाबे-कारहोनेदीजे
ख़ामुशी'नस्र'हैदर-अस्लज़हानतकीदलील
अपनेहालातकोअख़बारहोनेदीजे
  - M. Nasrullah Nasr
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