kahii gulaab kahii sabz ghaas rahne do | कहीं गुलाब कहीं सब्ज़ घास रहने दो

  - M. Nasrullah Nasr
कहींगुलाबकहींसब्ज़घासरहनेदो
चमनकोमेरेज़राख़ुश-लिबासरहनेदो
मैंख़ार-ओ-ख़सहीसहीकुछतोकामआऊँगा
मुझेजलाओनहींघरकेपासरहनेदो
ख़ुशीमिलीहैतुम्हारीयेख़ुश-नसीबीहै
उदासरहनाहैमुझकोउदासरहनेदो
कभीतुम्हारीनज़रमुझपेक्यूँनहींपड़ती
सुनाहैतुमहोसितारा-शनासरहनेदो
फ़क़ीररखतेनहींज़र्क़-बर्क़पोशाकें
मिरेबदनपेयेसादालिबासरहनेदो
ज़बानखोलोगेजबभीअनाभीजाएगी
करोउससेकोईइल्तिमासरहनेदो
हज़ारतल्ख़हैलहजाकिसीका'नस्र'तोक्या
ज़बाँमेंअपनीमगरतुममिठासरहनेदो
  - M. Nasrullah Nasr
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy