KHvaab men bhi na kabhi un se mulaqaat hui | ख़्वाब में भी न कभी उन से मुलाक़ात हुई

  - Laxmi Narayan Farigh
ख़्वाबमेंभीकभीउनसेमुलाक़ातहुई
हमेंहासिलकभीवज्ह-ए-मुबाहातहुई
फ़िक्र-ए-फ़र्दाहैकभीरंज-ओ-ग़म-ए-दोशकभी
किसक़दररूह-ए-बशरमोरिद-ए-आफ़ातहुई
ख़स्ता-हालीपेमिरीउनकोभीरोनाआया
बा'द-ए-मुद्दतमिरेवीरानेमेंबरसातहुई
वज्ह-ए-आशोब-ए-तमन्नाहुआफ़िक्र-ए-जन्नत
वज्ह-ए-आसूदगी-ए-रूहमुनाजातहुई
तिश्नगीमिटसकीकाम-ओ-दहनकी'फ़ारिग़'
ज़िंदगीमुफ़्तमेंमरहून-ए-ख़राबातहुई
  - Laxmi Narayan Farigh
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