naqaab-e-bazm-e-tasavvur uthaai jaati hai | नक़ाब-ए-बज़्म-ए-तसव्वुर उठाई जाती है

  - Laxmi Narayan Farigh
नक़ाब-ए-बज़्म-ए-तसव्वुरउठाईजातीहै
शिकस्त-ख़ुर्दोंकीहिम्मतबढ़ाईजातीहै
भटकनेलगताहैराह-ए-वफ़ासेजबआलम
हदीस-ए-इश्क़हमारीसुनाईजातीहै
मता-ए-होश-ओ-ख़िरदबे-बहासहीलेकिन
दर-ए-हबीबपेयेभीलुटाईजातीहै
नज़रसेहोतीहैलुत्फ़-ओ-करमकीबारिशभी
नज़रसेबर्क़-ए-तपाँभीगिराईजातीहै
वुफ़ूर-ए-शौक़कीदेखोतोमस्लहत-कोशी
जुनूँकीबातख़िरदसेछुपाईजातीहै
किसए'तिमादसेआग़ाज़-ए-दौर-ए-उल्फ़तमें
ख़याल-ओ-ख़्वाबकीदुनियाबसाईजातीहै
फ़ज़ा-ए-रूहपेतारीकियाँमुसल्लतहैं
हरममेंशम-ए-अक़ीदतजलाईजातीहै
दिखादिखाकेमआल-ए-जुनूँकीफ़ित्नागरी
बशरकोरस्म-ए-मुरव्वतसिखाईजातीहै
मता-ए-इश्क़-ओ-मोहब्बतनिगाह-ए-आलमसे
किसएहतियातसे'फ़ारिग़'छुपाईजातीहै
  - Laxmi Narayan Farigh
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