etbaar-e-aarzoo ka karr-o-far jaata raha | एतबार-ए-आरज़ू का कर्र-ओ-फ़र जाता रहा

  - Laxmi Narayan Farigh
एतबार-ए-आरज़ूकाकर्र-ओ-फ़रजातारहा
दिलसेइरफ़ान-ए-मोहब्बतकाअसरजातारहा
शम्अ'सोज़-ए-ग़मकाक़िस्सारातभरकहतीरही
देकेपरवानापयाम-ए-मुख़्तसरजातारहा
अहद-ए-रफ़्ताकोदेखालौटकरआतेहुए
एतबार-ए-गर्दिश-ए-शाम-ओ-सहरजातारहा
होसकेगाफिरसैक़लजौहर-ए-किरदार-ए-ज़ीस्त
गरजहाँसेए'तबार-ए-ख़ैर-ओ-शरजातारहा
ए'तिबार-ए-आरज़ू-ए-मुख़्तसरबाक़ीसही
ए'तिबार-ए-जज़्बा-ए-फ़िक्र-ओ-नज़रजातारहा
मुश्किलात-ए-इश्क़काउक़्दाफिरभीवाहुआ
नामा-बरआतारहाऔरनामा-बरजातारहा
फ़िक्र-ए-बेश-ओ-कमके'फ़ारिग़'मरहलेतयहोगए
दिलसेएहसास-ए-ग़मनफ़-ओ-ज़ररजातारहा
  - Laxmi Narayan Farigh
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