dil apna shab-e-hijr men raat bhar | दिल अपना शब-ए-हिज्र में रात भर

  - Latif Shah Shahid
दिलअपनाशब-ए-हिज्रमेंरातभर
लटकतारहादर्दकेदारपर
छुटीतेरीचौखटछुटाअपनाघर
मोहब्बतमेंयूँँहोगएदर-ब-दर
कभीहोहीजाएँगेग़मसेरिहा
कभीमिलहीजाएगीअपनीख़बर
तग़ाफ़ुलसेबढ़तीहैंरुस्वाइयाँ
ज़राहमपेभीडालिएइकनज़र
हुआअपनेहीहाथसेअपनाख़ूँ
हुआइश्क़कामा'रकाख़ूबसर
मोहब्बतमें'शाहिद'कोरासआसका
गुलशनसहरामस्जिदघर
  - Latif Shah Shahid
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy