in ke rukh par hijaab rehta hai | इन के रुख़ पर हिजाब रहता है

  - Laiq Akbar sahaab
इनकेरुख़परहिजाबरहताहै
जैसेमहपरसहाबरहताहै
वस्लकाजबसवालहोउनसे
बस''नहीं''मेंजवाबरहताहै
पासरहकरभीदरमियाँअपने
फ़ासलाबे-हिसाबरहताहै
हुस्नवालोंसेजोवफ़ाचाहे
उसकाख़ानाख़राबरहताहै
हम-सफ़रसोहनीसीहोकोई
मेरेख़ूँमेंचनाबरहताहै
मिस्ल-ए-ताएरहवामेंउड़ताहूँ
मेरीआँखोंमेंख़्वाबरहताहै
रेग-ए-सहराउन्हेंनिगलतीहै
जिनकीरहमेंसराबरहताहै
माँकीजिसकोदुआएँमिलजाएँ
उम्रभरकामयाबरहताहै
जानेकिसख़ाकसेबनाहूँमैं
रूहमेंइज़्तिराबरहताहै
उलझेरिश्तोंकीतल्ख़उलझनमें
उलझाउलझा'सहाब'रहताहै
  - Laiq Akbar sahaab
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