uthakar zindagi ki tum sabhi rangeeniyaan rakh do | उठाकर ज़िन्दगी की तुम सभी रंगीनियाँ रख दो

  - Priya omar
उठाकरज़िन्दगीकीतुमसभीरंगीनियाँरखदो
निकालोकोहसेदरियाजहाँभीबिजलियाँरखदो
मेरेपत्थरबदनपरकेकुछसरगर्मियाँरखदो
गुज़ारिशहैलबोंकीआजतुममदहोशियाँरखदो
हज़ारोंरंजशामिलहैंहमारेदरमियाँमाना
उठोकाटोअलगकरकेअनाकीबेड़ियाँरखदो
इमारतहीइमारतकेघनेजंगलबसाएहैं
किकहदोशम्ससेजाकरतपिशमेंनर्मियाँरखदो
बहुतसेदिनगुज़ारेहैंख़मोशीकेलिबासोंमें
तुम्हींआकरहवाओंआजकुछसरगोशियाँरखदो
भलायहभीकहाँमुमकिनकिमेरेदर्दकोनापो
चलोहिस्सेमेंमेरेऔरथोड़ीसिसकियाँरखदो
सियासतकररहीखिलवाड़जनताकीउमीदोंसे
जलाकरमिन्नतोंकीअब'प्रिया'सबअर्ज़ियाँरखदो
  - Priya omar
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