galtiyon se seekhne ka bhi maza kuchh aur hai | ग़लतियों से सीखने का भी मज़ा कुछ और है

  - Priya omar
ग़लतियोंसेसीखनेकाभीमज़ाकुछऔरहै
परजहाँकाआजकलतोक़ायदाकुछऔरहै
कररहेहैंहमतोरोज़ानामुलाक़ातेंमगर
निस्बत-ए-उल्फ़तबिनायेसिलसिलाकुछऔरहै
बढ़रहेहैंमेरेनक़्श-ए-पातुम्हारीगलियोंमें
राब्ताहैयानयासामश्ग़लाकुछऔरहै
मरहलादरमरहलाहमसाथचलतेहीरहे
जानताथादिलहमारारास्ताकुछऔरहै
अबचढ़ालीहैंज़बाँपरतल्ख़ियाँहमनेदिल
शीरींफ़ितरतसेअलगयहतजरबाकुछऔरहै
ज़िन्दगीउसमोड़परलाईकिकरलूँख़ुद-कुशी
ज़िंदारहकेमरनेकाभीहौसलाकुछऔरहै
हिज्र,आँसू,बेवफ़ाई,दर्द-ओ-ग़मसबहैं'प्रिया'
इसअज़िय्यतमेंसुख़नकाभीनशाकुछऔरहै
  - Priya omar
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