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Tehzeeb Hafi
ye dukkh alag hai ki usse main door ho raha hooñ
ye dukkh alag hai ki usse main door ho raha hooñ | ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ
- Tehzeeb Hafi
ये
दुख
अलग
है
कि
उस
सेे
मैं
दूर
हो
रहा
हूँ
ये
ग़म
जुदा
है
वो
ख़ुद
मुझे
दूर
कर
रहा
है
तेरे
बिछड़ने
पर
लिख
रहा
हूँ
मैं
ताज़ा
ग़ज़लें
ये
तेरा
ग़म
है
जो
मुझको
मशहूर
कर
रहा
है
- Tehzeeb Hafi
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कल
रात
मैं
बहुत
ही
अलग
सा
लगा
मुझे
उसकी
नज़र
ने
यूँँ
मेरी
सूरत
खंगाली
दोस्त
Afzal Ali Afzal
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ये
अलग
बात
कि
मैं
छोड़
चुका
कूज़ा-गरी
तेरे
जैसे
तो
मैं
मिट्टी
के
बना
सकता
हूँ
Imran Aami
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तमाम
फ़र्क़
मोहब्बत
में
एक
बात
के
हैं
वो
अपनी
ज़ात
का
नईं
है
हम
उस
की
ज़ात
के
हैं
Pallav Mishra
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उदासी
जैसे
कि
उसके
बदन
का
हिस्सा
है
अधूरा
लगता
है
वो
शख़्स
अगर
उदास
न
हो
Vikram Sharma
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नताएज
जब
सर-ए-महशर
मिलेंगे
मोहब्बत
के
अलग
नंबर
मिलेंगे
तुम्हारी
मेज़बानी
के
बहाने
कोई
दिन
हम
भी
अपने
घर
मिलेंगे
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Khurram Afaq
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ग़म
और
ख़ुशी
में
फ़र्क़
न
महसूस
हो
जहाँ
मैं
दिल
को
उस
मक़ाम
पे
लाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
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शब-ए-विसाल
बहुत
कम
है
आसमाँ
से
कहो
कि
जोड़
दे
कोई
टुकड़ा
शब-ए-जुदाई
का
Ameer Minai
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प्यादों
के
रंग
अलग
है
मगर
जाएँगे
सभी
शतरंज
ख़त्म
होने
पे
बक्से
में
एक
ही
Maher painter 'Musavvir'
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इश्क़
को
छोड़
सब
चुन
लिया
उसने
फिर
रख
दिया
फल
को
फिर
टोकरी
से
अलग
Neeraj Neer
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हक़ीक़ी
और
मजाज़ी
शा'इरी
में
फ़र्क़
ये
पाया
कि
वो
जा
में
से
बाहर
है
ये
पाजा
में
से
बाहर
है
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Akbar Allahabadi
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अब
मजीद
उस
सेे
ये
रिश्ता
नहीं
रखा
जाता
जिस
से
इक
शख़्स
का
परदा
नहीं
रखा
जाता
एक
तो
बस
में
नहीं
तुझ
से
मुहब्बत
न
करूँ
और
फिर
हाथ
भी
हल्का
नहीं
रखा
जाता
पढ़ने
जाता
हूँ
तो
तस्में
नहीं
बांदे
जाते
घर
पलटता
हूँ
तो
बस्ता
नहीं
रखा
जाता
दर-ओ-दीवार
पे
जंगल
का
गुमाँ
होता
है
मुझ
से
अब
घर
में
परिंदा
नहीं
रखा
जाता
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Tehzeeb Hafi
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ग़लत
निकले
सब
अंदाज़े
हमारे
कि
दिन
आए
नहीं
अच्छे
हमारे
सफ़र
से
बाज़
रहने
को
कहा
हैं
किसी
ने
खोल
के
तस्में
हमारे
हर
इक
मौसम
बहुत
अंदर
तक
आया
खुले
रहते
थे
दरवाज़े
हमारे
उस
अब्र-ए-मेहरबाँ
से
क्या
शिकायत
अगर
बर्तन
नहीं
भरते
हमारे
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Tehzeeb Hafi
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मुझ
से
मत
पूछो
के
उस
शख़्स
में
क्या
अच्छा
है
अच्छे
अच्छों
से
मुझे
मेरा
बुरा
अच्छा
है
किस
तरह
मुझ
से
मुहब्बत
में
कोई
जीत
गया
ये
न
कह
देना
के
बिस्तर
में
बड़ा
अच्छा
है
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Tehzeeb Hafi
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भरम
रखा
है
तेरे
हिज्र
का
वरना
क्या
होता
है
मैं
रोने
पे
आ
जाऊँ
तो
झरना
क्या
होता
है
मेरा
छोड़ो
मैं
नइँ
थकता
मेरा
काम
यही
है
लेकिन
तुमने
इतने
प्यार
का
करना
क्या
होता
है
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Tehzeeb Hafi
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कोई
समुंदर,
कोई
नदी
होती
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता
ताने
देने
से
और
हम
पे
शक
करने
से
बेहतर
था
गले
लगा
के
तुमने
हिजरत
का
दुख
बाट
लिया
होता
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Tehzeeb Hafi
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