kahii par hai zameen sookhi kahii baadal barsta hai | कहीं पर है ज़मीं सूखी कहीं बादल बरसता है

  - Priya omar
कहींपरहैज़मींसूखीकहींबादलबरसताहै
कोईइकबूँदकोतरसेकहींदरियाभरासाहै
चमनमेंहैंशजरऐसेसमरपत्तेहसींगुलपोश
मगरता'उम्रहोताकबपरिंदोंकाबसेराहै
सफ़रतन्हाहैमंज़िलमुसलसलचलतेजानातू
जहाँमेंहरकिसीनेख़ुदतलाशाअपनारस्ताहै
रहेगाकबतलकयूँँमुंतज़िरआज़ादीकेप्यारे
थेजिनकेहौसलेज़्यादाउन्होंनेतख़्तपलटाहै
जवानीछोड़जाएगीनफ़सभीबे-वफ़ाहोगी
ढलेजबउम्रतोफिरहरकोईबचकेनिकलताहै
मिलीनाकामियोंसेजानारिश्तोंकीहक़ीक़तको
किहरचेहरेकेपीछेभीछिपाइकऔरचेहराहै
किसीमतलबकीख़ातिरहीअदबसेमिलरहाहैतू
वगरनातेरालहजाकबहुआशीरेसेमीठाहै
लिखाजबहाल-ए-दिलअपना'प्रिया'कोयेसमझआया
जोउतराकाग़ज़ोंपरवोलहूकामेरेक़तराहै
  - Priya omar
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