gaavon men bhi hare shajar the kabhi | गाँवों में भी हरे शजर थे कभी

  - Priya omar
गाँवोंमेंभीहरेशजरथेकभी
सादगीसेभरेबशरथेकभी
सोनेसेदिनसितारोंकीरातें
दिलबड़ेऔरछोटेघरथेकभी
मुफ़लिसीथीमगरकोईशिकन
फ़िक्रसेलोगबेख़बरथेकभी
घाटपनघटभीखिलखिलातेथे
मिट्टीरंगेदिवार-ओ-दरथेकभी
थाबुज़ुर्गोंकाहाथसरपेसदा
मशवरेसाथपुरअसरथेकभी
रास्तेकच्चेपरयक़ींपक्के
सबमुसाफ़िरहीराहबरथेकभी
होचलेगाँवशह्रजैसेअब
जोबनावटसेबेअसरथेकभी
  - Priya omar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy