ye zikr aaine se subh-o-shaam kis ka hai | ये ज़िक्र आइने से सुब्ह-ओ-शाम किस का है

  - Kamal Ahmad Siddiqi
येज़िक्रआइनेसेसुब्ह-ओ-शामकिसकाहै
जोगुनगुनातेहोहर-दमकलामकिसकाहै
भरेहुएहैंसभीसिर्फ़एकख़ालीहै
अगरयेमेरानहींहैतोजामकिसकाहै
जोअहल-ए-ज़र्फ़हैंप्यासेवहीहैंमहफ़िलमें
येदौरकिसकाहैयेइंतिज़ामकिसकाहै
हमारेनामपेक्याक्यानहींहुआहैयहाँ
ज़रापतातोचलाओनिज़ामकिसकाहै
तुम्हारेराज़जोइफ़शाहुएहैंदुनियापर
नहींयेकामतुम्हारातोकामकिसकाहै
निशाँसुराग़होयेतुम्हारातर्ज़-ए-ख़ास
येक़त्ल-ए-आममगरतर्ज़-ए-आमकिसकाहै
'कमाल'नेजोपढ़ावक़्त-ए-क़त्लमक़्तलमें
सुनाहुआसालगावोकलामकिसकाहै
  - Kamal Ahmad Siddiqi
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