miraa sar kab kisi darbaar men KHam hota hai | मेरा सर कब किसी दरबार में ख़म होता है

  - Kamal Ahmad Siddiqi
मेरासरकबकिसीदरबारमेंख़महोताहै
कूचा-ए-यारमेंलेकिनयेक़दमहोताहै
पुर्सिश-ए-हालभीइतनीकिमैंकुछकहसकूँ
इसतकल्लुफ़सेकरमहोतोसितमहोताहै
शैख़मय-ख़ानेमेंकरताहैइरमकीबातें
इसीमय-ख़ानेकाइकगोशाइरमहोताहै
एकदिलहैकिउजड़जाएतोबस्ताहीनहीं
एकबुत-ख़ानाहैउजड़ेतोहरमहोताहै
राहबरराह-नवर्दीसेपरेशाँहै'कमाल'
जिसतरफ़जाएमिरानक़्श-ए-क़दमहोताहै
  - Kamal Ahmad Siddiqi
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