manzil ki dhoom dhaam se jab jee uchat gaya | मंज़िल की धूम धाम से जब जी उचट गया

  - Kalidas Gupta Raza
मंज़िलकीधूमधामसेजबजीउचटगया
रह-गीरजैसेसैंकड़ोंरस्तोंमेंबटगया
अफ़्सोसदिलतकआनेकीराहेंखुलसकीं
कोईफ़क़तख़यालतककरपलटगया
हमतौलबैठेसुब्ह-दमइंसाँकोसाएसे
सूरजकेसरपेआतेहीसायासिमटगया
क्याजानेकिसचटानसेटकरागयाहैदिल
चलताहुआसफ़ीनाअचानकउलटगया
अबकोईढूँड-ढाँडकेलाओनयावजूद
इंसानतोबुलंदी-ए-इंसाँसेघटगया
मंज़िलपेगर्द-ए-वहम-ओ-गुमाँथीवोधुलगई
रस्तेमेंअक़्लहोशकापत्थरथाहटगया
महफ़िलभीनूर-बारहैसाक़ीभीख़ुमब-दोश
मेरेहीनावनोशकामेयारघटगया
मंज़िलकहींमिलीमिलीलेकिन'रज़ा'
मंज़िलकेइश्तियाक़मेंरस्तातोकटगया
  - Kalidas Gupta Raza
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