bulaate kyun ho aajiz ko bulaana kya mazaa de hai | बुलाते क्यूँँ हो 'आजिज़' को बुलाना क्या मज़ा दे है

  - Kaleem Aajiz
बुलातेक्यूँँहो'आजिज़'कोबुलानाक्यामज़ादेहै
ग़ज़लकम-बख़्तकुछऐसीपढ़ेहैदिलहिलादेहै
मोहब्बतक्याबलाहैचैनलेनाहीभुलादेहै
ज़राभीआँखझपकेहैतोबेताबीजगादेहै
तिरेहाथोंकीसुर्ख़ीख़ुदसुबूतइसबातकादेहै
किजोकहदेहैदीवानावोकरकेभीदिखादेहै
ग़ज़बकीफ़ित्ना-साज़ीआएहैउसआफ़त-ए-जाँको
शरारतख़ुदकरेहैऔरहमेंतोहमतलगादेहै
मिरीबर्बादियोंकाडालकरइल्ज़ामदुनियापर
वोज़ालिमअपनेमुँहपरहाथरखकरमुस्कुरादेहै
अबइंसानोंकीबस्तीकायेआलमहैकिमतपूछो
लगेहैआगइकघरमेंतोहम-सायाहवादेहै
कलेजाथामकरसुनतेहैंलेकिनसुनहीलेतेहैं
मिरेयारोंकोमेरेग़मकीतल्ख़ीभीमज़ादेहै
  - Kaleem Aajiz
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